Bhrashtachar Par Nibandh, Corruption in Hindi, Essay on Corruption in Hindi

Essay on Corruption in Hindi । भ्रष्टाचार पर निबंध

भ्रष्टाचार पर निबंध (Essay on Corruption in Hindi) : दोस्तों आज हमने कक्षा 1 से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए काफी सरल शब्दों में भ्रष्टाचार पर निबंध (Bhrashtachar Par Nibandh) लिखे हैं। इसमें हमने भ्रष्टाचार की उत्पत्ति के कारण, इसके दुष्प्रभाव एवं इसके समाधान के उपाय के बारे में विस्तार से बताने की कोशिश करी है।

Essay on Corruption in Hindi । भ्रष्टाचार पर निबंध 

जैसा कि हम सभी जानते हैं। हमारे देश में सदियों से भ्रष्टाचार (Essay on Corruption in Hindi) नामक यह कुप्रथा चलती आ रही है और इसका ही परिणाम है, कि आज भी हमारे देश की स्थिति हद तक अच्छी नहीं है। हमारे देश में तो राजा महाराजा के समय से ही यह चलती आ रही है। क्योंकि अंग्रेजों ने राजाओं को घूस देकर भारत में अपनी सत्ता कायम कर ली। इस बात का साक्षी हमारा इतिहास है और सदा रहेगा।

हमारे देश के कुछ लोगों ने ही चंद रूपिये और अपनी जरूरत पूरा करने के लिए अपने ही देश से गद्दारी करते रहे और इन लोगों ने ही दीमक की तरह अंदर ही अंदर हमारे देश को खोखला बनाते चले गए और इसी भ्रष्टाचार के कारण हमारे ऊपर अंग्रेजों ने 200 सालों तक शासन किया और अपने ही देश में हम किसी दूसरे का गुलाम बन बैठे। इतना ही नहीं हद तो तब हो गई जब हमारा देश स्वतंत्र हुआ। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भी हमें कई समस्याओं का सामना करना पड़ा।

उस समय भारत को नया स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में खड़ा करना तथा गरीबी को हटाना प्रमुख समस्याएं थी। परंतु जब हमारे राजनेता व बड़े अफसर इस देश को चलाने लगे तब से तो समस्याओं के समाधान होने के वजह और कई नई-नई समस्याओं का पदार्पण होने लगा।

समाजवाद, बेरोजगारी, जातिवाद, भाषावाद, संप्रदायिकता और भ्रष्टाचार (Essay on Corruption in Hindi) जैसे तमाम समस्याओं के समाधान होने के बजाय और इसे बढ़ावा मिलना ही शुरू हो गया। वर्तमान समय में तो ऐसा प्रतीत होता है।

खासकर हमारे देश में दहेज प्रथा के तरह भ्रष्टाचार जैसी कुप्रथा को भी हमारे देश के नेता बड़े-बड़े अधिकारी एवं बड़े-बड़े उद्योगपतियों के साथ साथ कुछ आम जनता द्वारा भी इसे एक प्रथा के रूप में ही अपना लिया गया है और स्थिति ऐसी आ गई है कि हमारे देश मे आज भ्रष्टाचार एक आम बात सी हो गई है।

आज हमारे देश में कई ऐसे नेता एवं बड़े-बड़े अधिकारी हैं। जिन पर ना जाने बदनामी के कितने धब्बे लगे हैं। लेकिन फिर भी वे अपनी-अपनी गद्दी पर बैठे हैं और देश चला रहे हैं। ऐसी स्थिति में तो यह कहना स्वाभाविक है कि, अगर ऐसे ऐसे लोग हमारी सरकार चलाएंगे तो भ्रष्टाचार फैलेगा ही और ऐसे ही भ्रष्ट मानसिकता वाले लोगों के कारण आज हमारे देश का पूरा सरकारी व्यवस्था भ्रष्ट हो गया है।

What is Corruption? भ्रष्टाचार क्या है?Bhrashtachar Par Nibandh, Corruption in Hindi, Essay on Corruption in Hindi

वैसे तो भ्रष्टाचार नामक इस शब्द के सुनने मात्र से पता चल जाता है कि इसका अर्थ क्या है हमारे ख्याल से कहे तो भ्रष्टाचार का सरल अर्थ है – भ्रष्ट आचरण, भ्रष्ट व्यवहार, दुख:द व्यवहार, गिरा हुआ व्यवहार या फिर कहे तो स्वार्थ और लोभ के कारण किया गया अमानवीय व्यवहार ही भ्रष्टाचार कहलाता है।

दूसरे शब्दों में – भ्रष्टाचार दो शब्द भ्रष्ट+आचार से बना है। अर्थात ऐसा आचरण जो सामाजिक मान्यताओं और कानून-विरोधी हो। झूठ बोलना, दलाली करना, किसी का न्याय सम्मत काम करने के लिए रुपये अर्थात रिश्वत लेना, मिलावट, कालाबाजारी अनुचित आचरण करना, आदि भ्रष्टाचार (Essay on Corruption in Hindi) की श्रेणी में आते हैं। कुछ लोग तो घूस, मिलावट, आदि गलत कार्यों को ही भ्रष्टाचार की संज्ञा देते हैं। परंतु यह भ्रामक धारणा है।

भ्रष्टाचार का दायरा तो इतना बड़ा है कि, प्रधानमंत्री से लेकर चपरासी तक इसका फैलाव है। आजकल देश में सर्वाधिक चर्चित विषय है – भ्रष्टाचार। शायद ही कोई दिन है। जिस दिन एक नया भ्रष्टाचार का खुलासा नहीं होता है।

आज के दौर में विकसित से लेकर विकासशील – पूरी दुनिया इस बीमारी से ग्रसित है। अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संगठन ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल द्वारा 2018 के रिपोर्ट के अनुसार भ्रष्टाचार के मामले में भारत 78वें पायदान पर है। इससे यह प्रतीत होता है कि, पहले की तुलना में इस मामले में भारत की स्थिति कुछ ठीक हुई है। परंतु अभी भी तो काफी सुधार बाकी है।

भ्रष्टाचार आज शासन और समाज पर इतनी हावी हो गया है कि, इससे मुक्ति पाना असंभव सा प्रतीत हो रहा है। स्वतंत्रता के बाद भ्रष्टाचार का बोलवाला निरंतर बढ़ता गया और हमारे शासन और समाज में यह रोग इतना व्यापक हो गया है कि, इसका इलाज निकट भविष्य में संभव नहीं दिखता। स्वतंत्रता के पहले भ्रष्टाचार मात्र समाज में और वह भी संकुचित सीमा से व्याप्त था। किंतु स्वतंत्रता के बाद प्रशासन तंत्र में इसकी इतनी वृद्धि हो गई कि, पूरा प्रशासन ढांचा आज भ्रष्टाचार पर ही स्थिर हो गया है।

भ्रष्टाचार के कारण (Causes of Corruption in Hindi)

यह बात तो हम सभी जानते ही हैं कि, मुद्दा कोई भी क्यों ना हो जब तक उसका कोई कारण नहीं होता। वह न बढ़ता है या घटता है। उसी प्रकार हमारे देश में भ्रष्टाचार नामक जो समस्या है। काफी फैल चुकी है। अतः इसके फैलने के कुछ कारण भी हैं। जो निम्नलिखित हैं –

  • गरीबी ( Poverty) – हमारे देश में गरीबी काफी व्यापक समस्याओं में से एक है। परंतु आज गरीब तबके के लोग अपनी आवाज बड़े अधिकारी या राजनेता तक नहीं पहुंचा पाते हैं। यही कारण है कि, सरकारी-अधिकारी के साथ-साथ कुछ दलाल लोग इसका फायदा उठाता हैं और गरीब लोग को झांसे में रखकर अपनी निजी स्वार्थ को पूरा करने में लगा रहता हैं। जिससे भ्रष्टाचार फैलता है।
  • भ्रष्ट राजनीति व्यवस्था ( Corrupted Politics System) – हमारे देश में प्रत्येक दूसरा नेता भ्रष्ट है। ना जाने उसने कितने अपराधी प्रवृत्ति के काम किए होंगे। लेकिन इतना होने के बावजूद भी वे देश के नेता बनकर हमारे देश की सरकार चला रहे हैं। तभी तो यह कहना और भी आसान हो जाती है कि यदि हमारे राजा ही भ्रष्ट है। तो प्रजा का भ्रष्ट होना भी कोई आश्चर्य की बात नही है। यही कारण है कि, आज हमारे देश की सभी सरकारी संस्था से लेकर निजी संस्था तक भ्रष्टाचार अर्थात भ्रष्ट आदमियों की ही बोलवाला है।
  • कर चोरी (Tex Evasion) – आज के वर्तमान समय में हमारे देश में कई ऐसे लोग हैं। जिनके पास इतने पैसे हैं कि, हम आम जनता सही-सही अनुमान भी नहीं लगा पाएंगे। परंतु ये लोग भी अपना कर (tax) बचाने के लिए बड़े अधिकारियों को कर देते हैं। तथा विदेशी बैंको में पैसा जमा कर देते हैं। ताकि उनको कर ना देना पड़े। इस प्रकार हमारे देश के उद्योगपतियों के साथ-साथ बड़े-बड़े पदाधिकारी दोनों ही खुद भी भ्रष्ट होते जा रहे हैं और इस भ्रष्टाचार नामक कुप्रथा को भी बढ़ावा दे रहे।
  • जनसंख्या वृद्धि (Population Growth) – आज हमारे देश की जनसंख्या इतनी तेजी से बढ़ रही है कि, जनसंख्या के मामले में हमारा देश विश्व में दूसरा सबसे बड़ा देश बन चुका है। इतना ही नहीं अनुमान लगाया गया है कि, आने वाले कुछ ही समय में जनसंख्या के मामले में हमारा देश विश्व में कहीं प्रथम स्थान न ग्रहण कर ले।

परंतु जिस प्रकार से जनसंख्या मे वृद्धि हो रही है। उस प्रकार से उत्पादन तथा अन्य आवश्यकताओं की वृद्धि नहीं हो पा रही है। जिसके कारण लोग अपनी निजी स्वार्थ को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए सरकार व बड़े अधिकारियों को रिश्वत दे कर अपना कार्य करवाते हैं। इससे भी भ्रष्टाचार (Essay on Corruption in Hindi) फैल रहा है।

5. रिश्वतखोरी/ घूसखोरी (Bribery) – आज हमारे देश के बड़े से लेकर छोटे साडे सरकारी कार्यकर्ता इतने रिश्वतखोर हो गए हैं, कि वे बिना रिश्वत लिए कोई काम जल्दी करते ही नहीं है जिसके कारण हमारे देश के गरीब तबके के लोगो को कई सरकारी सुविधाओं से भी वंचित रहना पड़ता है। क्योकि इन रिश्वतखोरो के जितनी मांग होती है। वे लोग उतना नहीं दे पाते हैं।

6. अशिक्षा (Illiteracy) – हमारे देश में आज भी काफी संख्या में ऐसे लोग हैं। जो अशिक्षित हैं। खासकर गरीब तबके के लोग। ऐसी स्थिति में कई सरकारी सुविधाओं के बारे में उन्हें जानकारी ही नहीं मिलती है कि, वे उसका लाभ पा सके। क्योंकि कोई उन्हें जानकारी देना ही नहीं चाहता है। तो स्वाभाविक सी बात है कि, उन गरीब लोगों का सारा पैसा ये सरकारी अधिकारी ही हजम कर देते हैं। यही कारण है कि, आज भी हमारे देश के गरीबों की स्थिति वैसी की वैसी ही बनी है।

7. भाई-भतीजावाद (Nepotism) – धर्म-जाति तथा भाई-भतीजावाद नामक यह सारी कुप्रथा तो हमारे देश में आजादी के पहले से ही चलती आ रही है और आज के दौर में तो यह भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। क्योंकि इस प्रथा के कारण आज कई बड़े-बड़े अधिकारी अपने पदो का दुरुपयोग करके अपने परिवार के सदस्यों को नौकरी दिलाते हैं। चाहे वह व्यक्ति उस पद के काबिल नहीं भी क्यों ना हो। यही कारण है कि देश के कई अच्छे अच्छे विद्यार्थी बैठे रह जाते हैं।

जिससे बेरोजगारी की समस्या बढ़ती है। इस प्रकार हमें लगता है कि भ्रष्टाचार के ऐसे विकराल रूप धारण करने का सबसे बड़ा कारण इस अर्थप्रधान युग में प्रत्येक व्यक्ति का धन प्राप्ति में लगा होना है। मानव अपनी असीमित आवश्यकता की पूर्ति हेतु मनचाहे उपायों को अपना रहे हैं। यहां तक कि हमारा नेतृत्व करने वाला भी अपने उद्देश्य एवं जिम्मेदारियों को भूल गए हैं। इसी के परिणाम स्वरूप यह भ्रष्टाचार (Essay on Corruption in Hindi) ऊपर-नीचे सभी जगह व्याप्त हो गया है।

भ्रष्टाचार के प्रभाव (Effect of Corruption)

काम कोई भी क्यों ना हो उसका प्रभाव तो पड़ता ही है। फर्क सिर्फ इतना है कि, अगर काम अच्छा हो तो उसका प्रभाव भी अच्छा होता है। अगर काम खराब हो तो उसका प्रभाव भी खराब ही पड़ता है। और हम बात करने वाले हैं भ्रष्टाचार के प्रभाव के बारे में जो सर्वत्र एक खराब प्रथा के रूप में जाना जाता है। तो स्वाभाविक है कि, इसके प्रभाव भी खराब ही होंगे जिनमें से कुछ निम्नलिखित हैं-

  1. भ्रष्टाचार के कारण दूसरे देश के नजरों में आज हमारे देश की प्रतिष्ठा घट रही है। विदेशी लोग हमारे देश आने से घबराते हैं।
  2. भ्रष्टाचार के कारण ही खाद्य पदार्थ में सेठ – व्यापारियों द्वारा तेजी से मिलावट की जा रही है। जिसे खाने से लोग बीमार हो जाते हैं। परंतु इस पर रोक लगाने वाला कोई नहीं है।
  3. आये दिन खुले-आम छूड़ेबाजी, लूट, राहजनी बलात्कार आदि की घटनाएं होती है। यह सारी घटनाएं भी भ्रष्टाचार के ही प्रभाव हैं।
  4. भ्रष्टाचार के कारण ही आज बाजारो में नकली दवाइयां का बोलबाला है। कई बार इंजेक्शन की जगह दूषित पानी भरा रहता है। जिससे कई बार मरीजों की मृत्यु हो जाती है।
  5. प्राइवेट डॉक्टरों की मोटी फीस ही उनके भ्रष्टाचारी आचरण की कहानी कहती है।
  6. भ्रष्टाचार के कारण ही सरकारी अस्पतालों में गरीबों के लिए जगह नहीं होती। जबकि अमीरों को शीघ्र दाखिल कर लिया जाता है। जिससे बीमारी के उपचार के अभाव में कई गरीब तबके के लोग बेमौत ही मर जाते हैं।
  7. इसके कारण आज के दौर में वेश्यावृत्ति, शराबखोरी, जुआबाजी, जमीन-हड़प, पत्नी-हड़प आदि घटनाएं साधारण सी बात हो गई है।
  8. भ्रष्टाचार के कारण ही योग्य गरीब छात्र लंबी लाइनों में धक्के खाते रहते हैं। जबकि अमीर बाप के नालायक बेटे दो नंबर दरवाजे में प्रवेश पा लेते हैं। जिससे कई योग्य छात्र का मनोबल टूट जाता है और नौबत यहां तक आ जाती है कि, वे आत्महत्या करने को मजबूर हो जाते हैं।
  9. भ्रष्टाचार के कारण ही छोटे-छोटे किसानों को कई सरकारी सुविधाएं नहीं मिल पाती है। जिसके कारण वे खुद खाने लायक भी उपज नहीं कर पाते हैं। जिससे उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो जाती है।
  10. व्यापारी लोग रिश्वत देकर अपने सामान का दाम बढ़ा देते हैं। जिससे छोटे कारोबारी के व्यापार चौपट हो जाता है। जैसे- किसानों को उनकी फसल का उचित कीमत नहीं मिल पाता है। जिसके कारण वे सरकार की कर्ज भी नहीं चुका पाते हैं और दिन-ब-दिन कर्ज के बोझ से लदे जाते हैं। अंततः स्थिति ऐसी आ जाती है कि, वे आत्महत्या कर लेते हैं।
  11. इतना ही नहीं आज हमारे देश के शासन व्यवस्था में भी भ्रष्टाचार का प्रवेश हो गया है। यहां तक कि सरकारी कार्यालयों में तो चक्का भी घूमता है। जब उसमें घूस का पेट्रोल डाला जाता है। सरकारी स्कूल हो या ऑफिस, बस हो या बिजली, सबका बुरा हाल है। ऐसे-ऐसे अध्यापक है- जो वर्ष भर स्कूल के दर्शन किए बिना घर बैठे मासिक आय प्राप्त करते हैं।
  12. भ्रष्टाचार के कारण ही आज देश के कोने-कोने में बेरोजगारी की समस्या व्याप्त है। इस प्रकार आज भ्रष्टाचार के कारण ही गरीब तबके के लोग और भी गरीब होते जा रहे हैं और बड़े-बड़े उद्योगपति अर्थात अमीर लोग अमीर होते जा रहे हैं।

भ्रष्टाचार को दूर करने के उपाय (Measures to remove corruption)

  • कड़े कानून व्यवस्था का प्रावधान – हमारे ख्याल से भ्रष्टाचार को रोकने के लिए हमारे सरकार का पहला कदम होना चाहिए एक कड़े और सुसंगठित शासन व्यवस्था का प्रावधान करना। वैसे तो इसे रोकने के लिए कई कानून बनाए गए। जैसे:- बेनामी लेनदेन अधिनियम (1998), विनिमय एवं विकास अधिनियम (2006), सूचना का अधिकार अधिनियम (2005) भ्रष्टाचार (Essay on Corruption in Hindi) निवारण अधिनियम (1988)। परंतु इन कानून का सही तरीके से प्रयोग नहीं हो पाया। जिसका कारण है कि, आज भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया है। अतः इन कानूनों को सही ढंग से लागू करने की आवश्यकता है।
  • जनता को जागृत करना – हमारे ख्याल से अगर हम देशवासियों को भारत को भ्रष्टाचार के चंगुल से मुक्त देश बनाना है। तो हमें देश के कोने-कोने में निवास करने वाले जनता को जागृत करना होगा और इसके लिए हमें गांव एवं शहर के मोहल्ले-मोहल्ले जाकर। हमें वहां के लोगों को भ्रष्टाचार के जाल से बचने का उपाय बताना होगा, उन्हें अपने अधिकार के प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना होगा, किसी भ्रष्ट नेता या अधिकारी के खिलाफ आवाज उठाने के लिए हमे उनका साथ देना होगा। उन्हें सरकारी सुविधाओं के बारे में सूचित करना होगा। ताकि वे अपने अधिकारों का प्रयोग कर इन सरकारी सुविधाओं का लाभ उठा पाए।
  • धर्म-जाति या भाई-भतीजावाद जैसी कुप्रथा पर रोक लगाना – इस कुप्रथा के कारण आज ही बड़े-बड़े नेता एवं सरकारी अधिकारी अपने पदों का दुरुपयोग करते हैं जैसे जब कभी सरकारी भर्तियां निकलती है तो यह लोग चंद रुपया लेकर अपने परिवार के सदस्यों को नौकरी दिला देते हैं चाहे वह उस पद के लायक नहीं भी क्यों ना हो अतः हमारे सरकार को इसे रोकने के लिए कोई न कोई प्रावधान करना चाहिए।
  • शिक्षा व्यवस्था को आगे बढ़ाना – हमारी सरकार शिक्षा पर काफी व्यय करती है। फिर भी हमारे देश का शिक्षा स्तर कुछ हद तक ठीक नहीं है। आज भी हमारे देश में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं। जो अशिक्षित हैं। खासकर हमारे देश के ग्रामीण क्षेत्र की। यही कारण है कि, आज भी हमारे देश में सिर्फ 74% जनसंख्या ही शिक्षित है। अतः हमारे सरकार को देश की शिक्षा प्रणाली की ओर ध्यान देना चाहिए।
  • सही राजनेता का चुनाव – आज के दौर में जितने बड़े गुण्डे, चोर, भ्रष्टाचारी, अनपढ़ तथा अन्य असामाजिक तत्व हैं। ये सब भी अब आम चुनाव में खड़े होकर मंत्री बनने का सपना देखते हैं और दुर्भाग्य की बात तो यह है कि, उसका सपना पूरा भी हो जाता है। इस प्रकार शासन तंत्र पर ऐसे अवांछित वर्ग का प्रभुत्व हो जाता है। इसका कारण यह है कि हम आम जनता सही नेता का चुनाव नहीं करते। अतः में सही नेता का चुनाव करना चाहिए।

उपसंहार (Conclusion)

इस प्रकार हमारे देश के इस तपोभूमि पर भ्रष्टाचार (Essay on Corruption in Hindi) जैसी कुप्रथा का होना एक अभिशाप के समान है। आज के आधुनिक युग में हमारे देश के लोगों का चरित्र इतना भ्रष्ट हो गया है कि, वे सिर्फ अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करने में लगे रहते हैं। कभी आम जनता के बारे में सोचते ही नहीं। यही कारण है कि, हमारा देश भारत जो एक पवित्र भूमि के नाम से जाना जाता था। आज 21वीं सदी के भारत में तो शायद इसका नामो-निशान मिट चुका है।

जिसके कारण कही न कही आज हमारे देश की मान मर्यादा विश्व के सामने घटती नजर आ रही है। मेरे ख्याल से जब तक हमारे देश में कोई क्रांतिकारी सरकार सत्ता में स्थापित नहीं होती है। तब तक भ्रष्टाचार को किसी के लिए रोकना। लोहे के चने चबाने के बराबर होगा। अभी तो चोर-चोर मौसेरे भाई बने हुए हैं। भ्रष्टाचारियों द्वारा हमारे देश के शासन का और समाज का संचालन हो रहा है।

बिल्ली के हाथ में दही का मटका है? फिर शिकायत किससे। आज हमारे देश में लोगों की मानसिकता को देखकर ऐसा लगता है कि, सच में अगर भ्रष्टाचार दूर नहीं हुआ तो पता नहीं कब ये भ्रष्टाचारी लोग देश को बेच कर विदेश भाग जाएंगे। तभी तो किसी ने सच ही कहा है कि –

“धरा बेच देंगे, गगन बेच देंगे, कली बेच देंगे, कुसुम बेच देंगे। कलम के सिपाही अगर सो गए तो वतन के सिपाही वतन बेच देंगे।” अतः आवश्यकता है कि हम व्यक्तिगत जीवन में अधिक से अधिक नैतिक बने तभी यह संभव है।