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Samay Ka Sadupyog । समय का सदुपयोग

Samay Ka Sadupyog । समय का सदुपयोग : Friends आज मैं कक्षा 1 सें 12 तक के सभी विद्यार्थियों के लिए Samay Ka Sadupyog Par Nibandh लिखी हूं।

इस निबंध की सहायता से आप Samay Ka Sadupyog Par Bhashan भी लिख सकते हैं।आज इस निबंध के माध्यम से आप यह जान पाएंगे कि,

समय क्या हैं? (Samay Kya Hai?), हमारे जीवन में इसका क्या महत्त्व हैं। और हमें समय का सदुपयोग कैसे करनी चाहिए। उम्मीद करती हूँ कि, आज का यह Article आप के लिए उपयोगी होगी।

तो, आइए चलते है, अपनी मुद्दो की ओर, और Samay Ka Sadupyog नामक इस विषय पर विस्तृत जानकारी हाँसिल करने का प्रयास करते है।

Samay Ka Sadupyog । समय का सदुपयोग

समय का सदुपयोग नामक इस शब्द से तात्पर्य है। समय की महत्ता (Importance of Time in Hindi) को समझते हुए अपने जीवन के हर क्षेत्र में समय का कुशलता पूर्वक प्रयोग करना।

समय एक ऐसी चीज है, जो किसी भी स्थिति में अपने निरंतरता में बाध्यता नहीं आने देती है। यह हर पल चलती ही रहती है। हम मानव के जीवन में इसका सबसे अधिक महत्व है।

क्योंकि हमारी सफलता और असफलता इसी पर निर्भर करती है। क्योंकि सदियों से हमारे जीवन में ऐसा होता आया है कि, अगर सही समय पर हम किसी भी काम को सही ढंग से करते हैं।

तो हमें निश्चित रूप से सफलता हाँसिल होती है। परंतु उसी काम को सही ढंग से करने के बावजूद भी अगर उसे सही समय पर नहीं करते हैं। तो हमारा असफल होना निश्चित सा हो जाता है।

समय हमारे जीवन का वह बहुमूल्य तथ्य है। जिसे एक बार खो देने के बाद, पुनः हाँसिल नहीं किया जा सकता है। अतः निश्चित रूप से हमें अपने जीवन में सफल होने के लिए इसकी महत्त्व को समझना होगा।

समय का सदुपयोग निबंध। Samay Ka Sadupyog Par Nibandh

समय हमारे जीवन का वह महत्वपूर्ण पहलू है। जिसे एक बार खो देने के बाद, इस जीवन में उसे पुनः प्राप्त करना असंभव है। यह हमें जीवन में हमेशा आगे का रास्ता दिखाती है।

हमारे जन्म से लेकर मृत्यु तक “समय (Time)” नामक यह शब्द हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा होता है। अपने जीवन में समय का कुशलता पूर्वक उपयोग करना ही Samay Ka Sadupyog कहलाता है।

समय किसी का इंतजार नहीं करती है। यह हर-हमेशा चलती ही रहती है। इसकी अमूल्यता का अनुमान हम इन बातों से भी लगा सकते हैं कि,

हर Successful आदमी से अगर उसकी सफलता का मूल मंत्र पूछा जाता है। तो, उनके सभी बातों के अलावा एक बात “समय को पहचानना” निश्चित जुड़ा होता है।

जो मनुष्य जीवन में समय की मूल्यता को नहीं समझता है। उसके द्वारा जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता हाँसिल करना असंभव है।

जिस प्रकार दूध से एक बार दही बना देने के बाद उसे पुनः दूध के रूप में प्राप्त नहीं किया जा सकता है। ठीक उसी प्रकार जीवन में जो क्षण बीत जाता है। उसे पुनः प्राप्त करना संभव नहीं है।

हर मनुष्य के जीवन में एक सीमित समय होता है और जब इसका अंत हो जाता है। तो हमारे जीवन का भी अंत हो जाता है। समय वह रत्न है,

जिसका सही ढंग से उपयोग करने पर गरीब भी अमीर बन जाता है और गलत ढंग से प्रयोग करने पर अमीर-से-अमीर व्यक्ति भी गरीब हो जाता है।

अर्थात जो लोग समय को बर्बाद करते हैं। समय उसे बर्बाद कर देती है। समय के महत्तता और निरंतरता को ध्यान में रखते हुए कविवर कबीरदास जी ने ठीक ही लिखा है _

“काल करै सो आज कर, आज करै सो अब, पल में परलै होएगी, बहुरी करौगे कब॥”

अर्थात हमें शीघ्रता से समय रहते अपना काम पूरा कर लेना है। अन्यथा हम मुंह ताकते रह जाएंगे। अतः निश्चित रूप से किसी भी मनुष्य को अपने जीवन के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए समय का सदुपयोग करना अनिवार्य है।

Samay Ka Sadupyog Essay in Hindi।

मानव जीवन का प्रत्येक क्षण अमूल्य है। यदि एक क्षण का भी दुरुपयोग होता है। तो मानव सभ्यता का विकास चक्र रुक जाता है। एक पल की शिथिलता जीवन भर का पश्चाताप बन जाती है।

इन सभी वाक्यों का संबंध एक ही शब्द “समय” से जुड़ा हुआ है। ऐसा कहा जाता है कि, अगर किसी भी कठिन से कठिन कार्य को समय से किया जाए।

तो वह काफी सरलता पूर्वक और सही ढंग से संपन्न हो जाती है और वास्तविकता भी यही है। चाहे वह दुनिया का कोई भी काम क्यों न हो। दुनिया में कई ऐसी चीजें हैं।

जिसे हम अपनी आवश्यकतानुसार रोक सकते हैं और शुरू कर सकते हैं। परंतु समय ईश्वर के द्वारा दिया गया, वह वरदान है। जिसे न तो बढ़ाया जा सकता है, न घटाया जा सकता है।

संसार में आज तक जिस मनुष्य ने समय के मूल्य को पहचाना है और उसका सदुपयोग किया है। उन्होंने ही दुनिया के समक्ष अपना लोहा मनवाया है।

अपने आस-पड़ोस में अक्सर हमें लोगों के मुंह से एक शब्द सुनने को मिलता है। जो है- ‘क्या करूं समय नहीं मिलता है?’ परंतु वास्तविकता तो यह है कि,

हम मानव समय के साथ निरंतर चल नहीं पाते हैं। जबकि समय नामक अमूल्य संपदा का भंडार हमेशा हमारे पास होता है। और जब हम इस मूल्यवान संपदा को बिना सोचे समझे खर्च कर देते हैं।

तब हमें इसकी महत्ता समझ में आती ।है परंतु यह एक ऐसी चीज है। जिसे एक बार खो देने के बाद हमें पछताने के सिवा कुछ हाथ नहीं लगता है। इसलिए तो विद्वानों ने भी कहा है कि,

समय रहते हमें समय की महत्ता को समझ लेनी चाहिए तभी हम जीवन में सफल हो पाएंगे। इतना ही नहीं कई विद्वानों ने तो समय की महत्ता को स्पष्ट करने हेतु अपना विचार भी लिखे हैं।

हर वो मनुष्य जिन्होंने अपने जीवन में समय का सदुपयोग (Samay ka Sadupyog) किया है। संसार के सभी सुखों को पाने में समर्थ रहा है।

समय ही एक ऐसी चीज है। जो हमें ऊंचाई की शिखर तक पहुंचा सकती है। और हमें गर्त में भी ले जा सकती है। समय दुनिया के उन चीजों में अपना स्थान रखती है।

जिस पर दुनिया के किसी भी चीज का वश नहीं चलता है। क्योंकि इसे न कोई शुरू कर सकता है, न अंत। न कोई खरीद सकता है, न कोई बेच सकता है।

कुल मिलाकर कहें तो, समय पूर्ण रूप से स्वतंत्र है। यह एक ऐसा शासक है, जो दुनिया के समस्त संपदा को अपने अनुसार चलाती है। यहां तक कि हमारी प्रकृति भी समय के अनुसार ही चलती है।

समय हर मनुष्य को समान मौका देती है। फर्क सिर्फ इतना है कि, जो मनुष्य सही समय पर अपने मौका को पहचान लेता है। वह आगे बढ़ जाता है,

और जो अपना मौका चूक जाता है, वह पीछे रह जाता है। अगर हम विद्यार्थी जीवन में समय की महत्ता की बात करें, तो निश्चित रूप से हम कह सकते हैं कि, विद्यार्थी जीवन में समय की अहम भूमिका होती है।

क्योंकि हमें हर समय कोई न कोई उदाहरण ऐसा मिलता रहता है। जिसमें हम देखते हैं कि, जो छात्र छात्रा समय की महत्ता को शुरू में ही समझ जाते हैं।

और समय के साथ कदम-से-कदम मिलाकर हर हमेशा चलने को प्रयत्नशील रहते हैं। वे जीवन में हर उस बुलंदी को पा लेते हैं, जिसे पाना चाहते हैं।

जबकि जो विद्यार्थी इसकी महत्ता को नहीं समझ पाते है। वे जीवन में कभी कुछ नहीं कर पाते हैं और जीवन भर पछताते रह जाते हैं।

अतः आवश्यकता है कि, जीवन में आगे बढ़ने के लिए हम मनुष्य को समय का सदुपयोग करनी चाहिए।

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Samay Ka Sadupyog Par Anuched। समय का सदुपयोग पर अनुच्छेद

समय नामक यह शब्द हमारे जन्म से लेकर मृत्यु तक जुड़ा रहता है। और जो मनुष्य इसके मूल्य को समझ लेता है। उसे जीवन में कभी पछतावा नहीं होती है।

नष्ट हुई संपत्ति और खोए हुए वैभव को पुनः प्राप्त करने के लिए मनुष्य अनवरत श्रम करता है। एक दिन वह आता है, जबकि वह उसे फिर से प्राप्त करके फूला नहीं समाता।

मानव खोए हुए स्वास्थ्य को भी बुद्धिमान वेदो की सम्मति पर चलकर, पुष्टि-कारक औषधियों का सेवन करके तथा संयम जीवन व्यतीत करके एक बार फिर प्राप्त कर लेता है।

भूली हुई और खोए हुए प्रतिष्ठा को मनुष्य थोड़े से शर्म से पुनः प्राप्त करने में समर्थ हो जाता है। सदियों के भूले-बिछड़े मिल जाते हैं। परंतु जीवन के जो छन एक बार चले गए।

वह फिर इस जीवन में नहीं मिलता। कितनी अमूल्यता है क्षणों की, कितनी तीव्रता है, इसकी गति में। जो न आते मालूम पड़ते हैं, न जाते। परंतु चले जाते हैं।

एक ओर मानव के लघु जीवन की भयानक क्षण भंगुरता, दूसरी ओर सीमित समय की गतिशीलता एवं स्थिरता। समय न तो मनुष्य की प्रतीक्षा करता है, न तो परवाह।

रेलगाड़ी यात्रियों की प्रतीक्षा नहीं करती। उसमें कोई बैठे या न बैठे उसे अपने समय पर आना है और चले जाना है। जो लोग भीड़ को चीरते हुए,

आलस्य को छोड़कर छलांग मारते हुए, उसमें बैठ जाते हैं। वे अपने गंतव्य स्थान पर समय से पहुंच जाते हैं और जो प्लेटफार्म पर अपनी अकर्मण्यता, आलस्य, भीरूता या निद्रा के कारण पड़े रह जाते हैं।

वे न तो गाड़ी में बैठ पाते हैं, ना हीं अपने लक्ष्य तक पहुंच पाते हैं। ठीक यही बात समय नामक रेलगाड़ी के साथ है। जीवन में सफलता भी उन्हीं पुरुषों-सिंहो को प्राप्त होता है।

जो अपने एक क्षण का भी अपव्यय नहीं करते, अपितु अधिक से अधिक उसका उपयोग अर्थात समय का सदुपयोग (Samay Ka Sadupyog) करते हैं।

यही कारण है कि, संसार का महान से महान और कठिन से कठिन कार्य भी उनके लिए सुलभ हो जाता है। अब यह आपके ऊपर है कि, इन क्षणो का आप कैसे उपयोग करते हैं?

निद्रा में या निजी कार्य पूर्ति में, विद्या में या विवाद में, मैत्री में या कलह में, रक्षा में या परपीडन में। समय की अमूल्यता की घोतक कबीर की पंक्तियां भी कितनी महान है।

“काल करै सो आज करै, आज करै सो अब, पल में परलै होएगी बहुरी करैगा कब॥”

सफलता का रहस्य (Secret of Success)

जीवन की सफलता का रहस्य समय के सदुपयोग में ही निहित है। चाहे वह निर्धन हो या धनवान, किसान हो या मजदूर, राजा हो या प्रजा, विद्वान हो या मूर्ख, समय पर सब का सामान अधिकार है।

समय की सही उपयोगिता साधारण से साधारण व्यक्ति को भी महान बना देती है। इस संसार रूपी सागर में आज तक जितने भी महान पुरुष हुए हैं।

उनके जीवन की सफलता का रहस्य एकमात्र समय के अमूल्य क्षणो का सदुपयोग रहा है। आलस्य से रहित होकर यथासंभव प्रत्येक काम को करना ही समय की उपयोगिता है।

जो मनुष्य आज का काम कल पर टाल देते हैं। उनका काम कभी पूरा नहीं होता है। वह जीवन में सदैव पश्चाताप की अग्नि में जलते रहते हैं। परंतु जलने से कोई लाभ नहीं होता।

क्योंकि कहते है न कि “समय चुँकि, पुनि का पछताने” वे आगे बढ़ने के समय में भी पीछे रहते है। बुद्धिमान व्यक्ति अपने अवकाश के क्षणों को भी व्यर्थ नहीं जाने देता।

जबकि मूर्ख व्यक्ति के लिए समय का कोई मूल्य नहीं होता है। वही बुद्धिमान व्यक्ति समय के सदुपयोग (Samay Ka Sadupyog) में आत्मिक आनंद और शारीरिक सुख का अनुभव करता है।

ऐसे व्यक्ति का सामाज आदर करता है। समय का अपव्यय करना आत्महत्या के समान होता है। संसार से ऊबकर जीवन मुक्त होने के लिए मानव आत्महत्या का साधन ढूंढता है।

आत्महत्या उसे जीवन के संघर्षों से सदा-सदा के लिए मुक्त कर देती है। ठीक इसी प्रकार समय का दुरुपयोग अनिश्चितकाल के लिए मानव जीवन को मृतप्राय कर देता है।

समय की दुरुपयोगता मानव को कायर, पुरुषर्थहीन एवं अनुद्योगी और अकर्मण्य बना देती है। समय की दुरपयोगिता से केवल विचार ही दूषित नहीं होता बल्कि मानव का नैतिक पतन हो जाता है।

समय के सदुपयोगता के उपाय (Time Utilization Measures)

समय के सदुपयोग के लिए मनुष्य को अपने प्रतिदिन के कार्य का समय विभाजन कर लेना चाहिए। उसे इस बात को दृष्टि में रख लेना चाहिए कि, उसे किस समय क्या करना है?

जिस मनुष्य का कार्यक्रम सुनिश्चित नहीं होता। उसका अधिकांश समय व्यर्थ में इधर-उधर बीत जाता है। जो मनुष्य अपना निश्चित कार्यक्रम बनाकर मानसिक वृत्तियों को एकाग्र करके कार्य करता है।

उसे जीवन संग्राम में अवश्य सफलता प्राप्त होती है। विद्यार्थियों को अपने समय का सदुपयोग करने के लिए एक टाइम-टेबल बना लेनी चाहिए।

उन्हें ध्यान रखना चाहिए कि, उनका निश्चित कार्य उस निश्चित समय में पूर्ण हुआ अथवा नहीं। जो छात्र नियत समय में अपने कार्य में पूर्ण मनोयोग के साथ संलग्न नही होता है।

उसका भविष्य सदा अंधकारमय रह जाता है। समय विभाजन करते समय इन बातों का ध्यान रखना चाहिए कि, शारीरिक और मानसिक थकावट अधिक ना होने पावे।

उसमें मनोरंजन की भी व्यवस्था करनी चाहिए। क्योंकि मनोरंजन से जीवन में सरसता आती है और शक्ति का संचय होता है।

समय के सदुपयोग से लाभ (Benefits From Good Use of Time)

समय के सदुपयोग से मनुष्य की व्यक्तिगत उन्नति होती है। देश और समाज की उन्नति में भी हम अपना योगदान दे पाते हैं। मनुष्य को न सिर्फ समाज में बल्कि जहां भी वह जाता है, उसे सम्मान मिलता है।

जिस मनुष्य ने अपने जीवन में समय की मूल्यता को समझा है। उसे निश्चित रूप से जीवन के हर सुख की प्राप्ति हुई है। इस प्रकार हम कहे तो समय ही हमारे जीवन में होने वाले दुख और सुख को तय करता है।

आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। क्योंकि आलसी मनुष्य ही अपने जीवन में कोई उन्नति नहीं कर पाता है।

आलस्य का परित्याग करके समय का सदुपयोग (Samay Ka Sadupyog) करने वाले व्यक्ति ही साहित्य के सृष्टा, राष्ट्रनायक वैज्ञानिक और आविष्कारक हुए हैं।

उपसंहार (Conclusion)

अंग्रेजी की एक कहावत है “Time is Money” और वास्तविकता भी यही है कि, समय धन से भी अधिक मूल्यवान है। सिरसो ने समय को “सत्य का पथ-प्रदर्शक” माना है।

समय एक संपत्ति है। समय पर किया गया, थोड़ा सा कार्य मनुष्य को अनेक कठिनाई से बचा लेता है। वही मैसन का विचार है कि “स्वर्ण का प्रत्येक अंश जिस तरह मूल्यवान होता है, उसी प्रकार समय का प्रत्येक अंश मूल्यवान होता है।”

जो व्यक्ति समय का सम्मान करता है, उससे कहीं अधिक सम्मान समय उसे दिलाता है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा है कि “समय जाते नहीं लागहिं बारा।”

समय की गति तीव्र है। प्रत्येक बुद्धिमान व्यक्ति का कर्तव्य है कि, वह समय का उचित मूल्यांकन करते हुए, उसका उपयोग करें। समय की गति रोकी नहीं जा सकती है।

आज के वैज्ञानिक ने प्रकृति के तत्वों पर अपना अधिकार करना प्रारंभ कर दिया है। परंतु समय को वश में नहीं कर पाया। इसलिए यदि हम अपनी शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक उन्नति करना चाहते हैं।

अपने देश और अपनी जाति का उत्थान करना चाहते हैं। तो निश्चित रूप से हमें अपने समय का सदुपयोग करना सीखना चाहिए, तभी हमारी उन्नति संभव है।

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