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About Sparrow in Hindi । गौरैया के बारे में

About Sparrow in Hindi । गौरैया के बारे में : Friend’s, आज मैं कक्षा 1 से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए गौरैया पर निबंध अर्थात गौरैया के बारे में लिखने का प्रयास करी हैं।

इस निबंध के माध्यम से आज मैं आप सबको गोरैया से संबंधित संपूर्ण जानकारी देने का अथक प्रयास करूंगी। तो चलिए, दोस्तों जानते हैं, इस छोटे से पक्षी के बारे में कुछ रोचक बातें।

About Sparrow in Hindi । गौरैया के बारे में

गौरैया एक छोटा सा पक्षी है, जो लगभग संपूर्ण एशिया और यूरोप महादेश में पाया जाता है। यह पक्षी मुख्यतः ग्रामीण इलाकों में पाया जाता है, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में गौरैया को रहने का निवास स्थान आसानी से मिल जाता है।

अब कुछ सालों से यह पक्षी शहरी इलाकों से पूर्णत: गायब हो चुकी है। इसका मुख्य कारण शहरी इलाकों में बदलते वातावरण और उपयुक्त परिस्थिति के नष्ट होने को माना जाता है।

यह पक्षी ग्रामीण क्षेत्रों में किसान प्रेमी होती है। आमतौर पर यह पक्षी कीड़े-मकोड़े, दाना, अनाज इत्यादि खाती है। यह छोटी सी पक्षी बहुत तेजी से अपना पंख फड़फड़ाती है।

जिस कारण यह बहुत तेजी से उड़ती है। गोरैया का वजन (weight of sparrow) 50 ग्राम से भी कम होता है। यह पक्षी जमीन पर चलने के बजाय उछल- उछल कर चलना अधिक पसंद करती है।

गौरैया पहाड़ी इलाकों में कम देखने को मिलती है। गौरैया एक ऐसी पक्षी है जिनमें नर और मादा अलग-अलग दिखते हैं। आमतौर पर नर गोरैया दिखने में ज्यादा आकर्षक होता है।

गौरैया उन पक्षियो (Sparrow in Hindi) में शुमार हैं। जिसे लोग काफी पसंद करते है। भारत में ग्रामीण क्षेत्रों में इस पक्षी के मांस को खाया जाता है। इस की घटती संख्या का एक कारण यह भी है।

Information About Sparrow in Hindi in 250 Words

गौरैया दिखने में बहुत छोटी होती है। भारत में यह पक्षी ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतर पाया जाता है। वैसे तो यह पक्षी संपूर्ण विश्व में पाया जाता है। परंतु भारत इसका प्रमुख निवास स्थान में से एक है।

यह पक्षी दिखने में भी काफी आकर्षक होती हैI हम आज भी इस छोटे से पक्षी को ग्रामीण क्षेत्रों में आसानी से देख सकते हैं। भारत में यह पक्षी कीटों को खा कर किसानों की मदद करती है।

वर्तमान समय में यह पक्षी कई कारणों की वजह से विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गई है। इस कारण विश्व भर में इस पक्षी के संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।

20 मार्च को संपूर्ण विश्व में “World Sparrow Day” मनाया जाता है। यह पक्षी हमारे पारिस्थितिक तंत्र के लिए आवश्यक ही नहीं बल्कि अनिवार्य है।

आमतौर पर यह पक्षी अपने भोजन की तलाश में कई किलोमीटर दूर तक जा सकती है। इस पक्षी को बिल्ली,सांप ,कुत्ते ,लोमड़ी इत्यादि खा जाते हैं।

गोरैया का आम तौर पर आयु काल 4 से 7 वर्षों का होता है। यह बहुत ही फुर्तीला पक्षी है । गोरैया हमेशा अपने पूंछ को हिलाती रहती है। दुनिया भर में गोरैया के कई प्रजातियां पाई जाती है।

यह पक्षी औसत रूप से 35 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ सकती है। इस पक्षी के विलुप्त होने का सबसे मुख्य कारण मोबाइल टावरों से निकले तरंग है।

क्योंकि यह तरंगे इनके मस्तिष्क पर सीधा असर करता है। अगर हमारे वातावरण के लिए गौरैया की महत्ता (Importance of Sparrow) की बात की जाय तो, यह हमारे वातावरण के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण पक्षी है।

Information of Sparrow in Hindi in 550 Words

गौरैया एक नन्ही-सी पक्षी है, जो मात्र 14 से 16 सेंटीमीटर की होती है। साथ ही साथ इसका वजन 25 से 40 ग्राम की बीच होता है। गौरैया अपने छोटे से पंख को बहुत तेजी से फड़फड़ाती है।

जिससे यह पक्षी बहुत ही तेज गति से उड़ पाती है। गोरैया औसतन 35 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकती है। यह पक्षी हमेशा झुंड में रहना पसंद करती है।

इसके शरीर का रंग बहुत ही आकर्षक होता है। अगर के गौरैया रंग की बात जाय तो, यह हल्के भूरे और सफेद रंग की होती है। इसके साथ ही साथ इसका चोंच पीले रंग का होता है।

यह नन्ही-सी पक्षी हमारे पारिस्थितिक तंत्र के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। यह हमारे वातावरण में मौजूद कीट-पतंगों को खाकर वातावरण को शुद्ध बनाए रखती है। यह पक्षी आसानी से गांवों में मिल जाता है।

परंतु शहर में अब यह पक्षी लगभग विलुप्त हो चुकी है। इसका मुख्य कारण शहरों में बने बड़े-बड़े उद्योग, कारखाने ,बिल्डिंग ,वायु प्रदूषण ,मोबाइल टावर से निकले तरंगे इत्यादि को माना जाता है।

भारत के अलावा यह पक्षी लगभग संपूर्ण विश्व में पाया जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत तो यह है कि यह अपने भोजन की तलाश में कई-कई किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकती है।

गौरैया की आवाज (voice of sparrow) बहुत ही मधुर और सुरीली होती है। इस पक्षी के घटते संख्या का एक कारक मनुष्यों द्वारा मांस के लिए इसको मारना भी है।

वर्तमान समय में विश्व स्तर पर इसकी संरक्षण के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। उन्हीं महत्वपूर्ण कदमों में से एक वैश्विक स्तर पर 20 मार्च को ‘वर्ल्ड स्पैरो डे’ को मनाना है।

भारत सरकार भी इस पक्षी के संरक्षण में कोई कोर कसर नहीं छोड़े हुए हैं। यही कारण है कि गोरैया को बिहार और दिल्ली सरकार द्वारा राजकीय पक्षी घोषित किया गया है।

अभी तक हुए खोज के अनुसार दुनिया भर में गौरैया के लगभग 43 प्रजातियां है।सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि नर और मादा गोरैया में रंग के आधार पर अंतर किया जा सकता है।

जैसे-मादा गोरैया भूरे रंग की होती है, जबकि नर गौरैया का रंग भूरा ही होता है परंतु उसके गर्दन पर काली पट्टी होती है। यह एक सर्वाहारी पक्षी है , क्योंकि यह कीट-पतंगे, दाना ,बीज ,फल ,अनाज इत्यादि खाती है।

आमतौर पर मादा गौरैया 1 साल में 3 से 5 अंडे देती है। इतना ही नहीं बल्कि अंडा से बच्चा निकलने में 12 से 15 दिन का समय लग जाता है

सबसे खास बात तो यह है कि अंडे से बच्चे निकलने के लगभग 15 दिन बाद ही बच्चा अपना भरण-पोषण खुद करने लगता है। जिस कारण नर और मादा गौरैया उस घोसले को छोड़ देती है।

गौरैया का जीवनकाल 4 से 7 वर्षों का होता है। गौरैया की सबसे बड़ी विशेषता तो यह है कि यह पानी में तैरने में सक्षम होती है। इतना ही नहीं बल्कि गौरैया की आंख के रेटिना में 4 लाख फोटोरिसेप्टर प्रति वर्ग मिली मीटर होती है।

गोरैया अपना तनाव दूर करने के लिए अपना पूंछ को हिलाती रहती है। यह पक्षी फूस यानी खरपतवार से बने घरों में रहना अधिक पसंद करती है।

हम आज भी इसके घोंसले को ग्रामीण घरों में देख सकते हैं। वैसे तो आम भाषा में नर गुड़िया को ‘चिड़ा’ और मादा गुड़िया को ‘चिड़ी’ कहा जाता है। पिछले कुछ दशकों से गौरैया की संख्या में काफी कमी आई है।

अगर समय रहते इस पक्षी के संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया गया तो अवश्य ही यह अन्य जीवो की तरह हमारी पृथ्वी पर से विलुप्त हो जाएगी। हमें इस नन्हीं-सी जीव के संरक्षण हेतु हर संभव प्रयास करनी चाहिए।

Long Type Eassy About Sparrow in Hindi

गौरैया एक ऐसी पक्षी है, जो संपूर्ण भारतवर्ष के अलावा एशिया और यूरोप महादेश में भी पाया जाता है। यह बहुत आकर्षक होती है। यह हमेशा कुछ न कुछ करती रहती है। इसकी ची-ची की आवाज बहुत ही मधुर होती है।

यह पक्षी भारत में ग्रामीण क्षेत्रों में मुख्य रूप से पाया जाता है। यह गांव के कच्चे मकान में, पेंड़ो पर इत्यादि जगह घोंसला बनाकर रहती है । यह खेतों में मौजूद कीट पतंगों को खाकर किसानों को कीट पतंगों से राहत दिलाती है।

यही कारण है कि गोरैया को किसान प्रेमी पक्षी कहा जाता है। आमतौर पर गौरैया शहरों में कम पाया जाता है। यह पक्षी हमेशा झुंड में रहना पसंद करती है।

आमतौर पर हमारे स्थानीय भाषा में नर गौरैया को ‘चिड़ा’ और मादा गौरैया को ‘चिड़ी’ कहा जाता है। यह अपने छोटे से पंख की सहायता से बहुत तेजी से उड़ती है।

सामान्य रूप से एक गौरैया का जीवनकाल 4 से 7 वर्षों का होता है। गौरैया एक सर्वाहारी पक्षी के श्रेणी में गिना जाता है। यह उन पक्षों में शुमार है जो विश्व भर में पाया जाता है।

यह बहुत ही फुर्तीली होती है। गोरैया आमतौर पर पहाड़ी इलाकों में कम दिखती है। गौरैया कई कारणों की वजह से आज विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गई है।

गौरैया का शारीरिक संरचना (Body Structure of Sparrow)

यह तो हम सभी जानते हैं कि, गौरैया एक छोटी-सी पक्षी होती है। इसके 2 आँख, दो पंख और एक छोटा-सा चोंच होता है। इसके शरीर की संरचना बहुत ही आकर्षक होती है।

साथ ही साथ इसके दो छोटे पंख उड़ने में गौरैया को मदद करती है। इसके आंख के चारों ओर का रंग काला होता है ।इस छोटी-सी पक्षी का आकार मात्र 16 सेंटीमीटर होता है और वजन 25 से 40 ग्राम के बीच होता है।

यह अपने पंखों की सहायता से 25 मील प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ सकती है। इसकी ची-ची की आवाज बहुत ही सुरीली होती है।

गौरैया का निवास स्थान (Habitat of Sparrow)

जहां तक गौरैया के निवास स्थान की बात है तो, गौरैया मुख्य रूप से पेड़ों पर ,कच्चे घरों में घोसला बनाकर रहती है। यह पक्षी भारत में मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक और शहरी क्षेत्रों में कम दिखाई देता है । आज गोरैया शहर से लगभग विलुप्त हो चुकी है।

आमतौर पर घोंसला बनाने का जिम्मेदारी नर गौरैया पर होता है। जिस से आकर्षित होकर मादा गौरैया उसमें आकर अंडे देती है। गौरैया के निवास स्थान में आज वर्तमान समय में भारी कमी आई है।

गौरैया का भोजन (Food of Sparrow)

गौरैया प्राकृतिक रूप से मांसाहारी होती है। परंतु लंबे समय तक मनुष्य के संपर्क में रहने के कारण अब यह सर्वाहारी की श्रेणी में आ गई है, क्योंकि गौरैया मांसाहारी और शाकाहारी दोनों प्रकार की भोजन ग्रहण करती है।

जहां तक गौरैया की भोजन की बात है तो गौरैया कीट-पतंगे, अनाज, फल, बीज, दाना इत्यादि खाती है, बिल्ली, कुत्ता, लोमड़ी, सांप इत्यादि जीव इस नन्हीं सी पक्षी का शिकार कर लेता है।

वैसे गौरैया बहुत छोटी होती है।इस कारण इसे बहुत कम भोजन की आवश्यकता होती है। परंतु फिर भी यह अपने भोजन की तलाश में कई-कई किलोमीटर तक की सफर तय कर सकती है।

गौरैया का प्रजाति(Species of Sparrow)

गौरैया उन पक्षियों में से एक है, जिनका प्रजाति लगभग पूरे विश्व में पाया जाता है। अभी तक हुए खोज के अनुसार वैज्ञानिक ने गौरैया के 43 प्रजाति होने की बात कही है।

गौरैया के कुछ प्रजातियों के नाम इस प्रकार है – सिंड स्पैरो, ट्री स्पैरो, डेड सी स्पैरो, हाउस स्पैरो, रसेट स्पैरो, स्पेनिश स्पैरो इत्यादि।गौरैया के उपयुक्त सभी प्रजाति दुनिया के अलग-अलग भागों में पाया जाता है जो एक दूसरे से कुछ ना कुछ भी अवश्य होते हैं।

गौरैया का रंग (Colour of Sparrow)

जहां तक गौरैया की रंग की बात है तो, गौरैया मुख्य रूप से हल्के भूरे एवं सफेद रंग की होती है I इतना ही नहीं बल्कि गौरैया के पैर, पंख और चोंच पीले रंग का होता है।

सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि, हम नर एवं मादा गोरैया में (Sparrow in Hindi) रंग के आधार पर ही अंतर कर सकते हैं, क्योंकि मादा गोरैया के शरीर का रंग भूरा होता है।

परंतु नर गौरैया के शरीर का रंग तंबाकू के रंग जैसा होता है और गर्दन पर काले रंग की पट्टी होती है। यह अपने रंग के कारण बहुत ही आकर्षक दिखती है।

गौरैया के विलुप्त होने का कारण (The Reason of Sparrow Extinction)

अगर हम गौरैया के घटते संख्या की बात करें तो इसके कई कारण हैं। जिसके वजह से आज दिनों-दिन इसकी संख्या में कमी आ रही है। गौरैया के घटती संख्या का मुख्य कारण निम्न है-

पेड़ों का अंधाधुंध कटाई, वायु प्रदूषण, शहरों बने बड़े-बड़े उद्योग और बिल्डिंग, मोबाइल टावर से निकले तरंगे इत्यादि। पिछले कुछ दशकों में उपयुक्त कारणों की वजह से गौरैया के (Sparrow in Hindi) संख्या में भारी कमी आई है।

उपसंहार (Conclusion)

गोरैया एक नन्ही-सी सुंदर पक्षी है। यह हमारे वातावरण के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। हमें इसकी संरक्षण हेतु महत्वपूर्ण कदम उठानी होगी

क्योंकि गौरैया पारिस्थितिक तंत्र के लिए बहुत ही आवश्यक है। हमें गौरैया को विलुप्त होने से बचाना होगा। यह एक आकर्षक पक्षी है।

5 Sentences About Sparrow in Hindi।

  • यह एक सर्वाहारी पक्षी है।
  •  इसका आयु काल 3 से 7 वर्षों का होता है।
  • गौरैया हमेशा झुंड में रहना पसंद करती है।
  • दुनिया भर में गौरैया के 43 प्रजातियाँ है।
  • गौरैया एशिया और यूरोप महादेश में पाया जाता है।

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